राष्ट्रीय सीप दिवस पर उरई में सजी अनूठी ‘सीप वीथिका’, दुर्लभ सीपियों ने मोहा आगंतुकों का मन

National Uttarakhand

उरई। राष्ट्रीय सीप दिवस के अवसर पर इन्टैक (INTACH) उरई अध्याय की ओर से चूड़ी वाली गली स्थित श्रीमती संध्या पुरवार के आवास पर अनूठी ‘सीप वीथिका’ का आयोजन किया गया। वीथिका में विभिन्न आकार, रंग और आकृतियों की करीब 50 प्रकार की सीपियों के साथ दुर्लभ शंख, कौड़ियां तथा सीप के आकार की रजतीय मुद्राओं का आकर्षक संग्रह प्रदर्शित किया गया। दुर्लभ समुद्री जीवों से जुड़ी इस प्रदर्शनी ने आगंतुकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

वीथिका का शुभारंभ दयानंद वैदिक महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य एवं जीव विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने श्रीगणेश की प्रतिमा के समक्ष शंखनाद के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शित संग्रह का अवलोकन करते हुए कहा कि जीव विज्ञान के विद्यार्थी और शिक्षक के रूप में उन्होंने सीपियों, शंखों और कौड़ियों के अनेक रूप देखे हैं, लेकिन एक ही स्थान पर इतनी विविध और दुर्लभ सीपियों का संग्रह उनके लिए भी आश्चर्य का विषय है। उन्होंने इस अनूठे संग्रह के लिए डॉ. हरिमोहन पुरवार और श्रीमती संध्या पुरवार को बधाई दी।

वीथिका के संयोजक डॉ. हरिमोहन पुरवार ने सीपियों के जैविक एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सीप समुद्री मोलस्का परिवार का जीव है और दुनिया के अनेक समुद्री तटीय क्षेत्रों में इसे खाद्य पदार्थ के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि सीपियां समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि एक सीप प्रतिदिन बड़ी मात्रा में समुद्री जल को फिल्टर करने में सक्षम होती है। इस प्राकृतिक प्रक्रिया से समुद्री जल की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है और समुद्री चट्टानों, जीवाश्मों तथा विभिन्न वनस्पतियों को भी पारिस्थितिक संरक्षण मिलता है।

वीथिका में प्रदर्शित लगभग 50 प्रकार की छोटी-बड़ी, रंग-बिरंगी और विभिन्न आकार-प्रकार वाली सीपियां आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। कुछ सीपियां अपनी बनावट और रंगों के कारण बेहद दुर्लभ और कलात्मक दिखाई दीं। इसके अलावा सीप के आकार की रजतीय दुर्लभ मुद्राओं तथा छोटे आकार के विभिन्न शंखों को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया।

आयोजकों के अनुसार, वीथिका का उद्देश्य केवल दुर्लभ सीपियों का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि लोगों को समुद्री जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी था।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव एवं उनकी पत्नी श्रीमती पुष्पा श्रीवास्तव का श्रीमती संध्या पुरवार और चंचल मिश्रा ने अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर श्रीमती संध्या पुरवार, प्रियंका अग्रवाल और चंचल मिश्रा ने अतिथियों को स्मृति चिह्न प्रदान किए।

सीप वीथिका के अवलोकन के दौरान राहुल पाटकर, डॉ. अभिषेक गुप्त (लकी), अरुण कुमार लाल, विश्वनाथ पुरवार, कु. काजल राजपूत सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। अंत में शिवशंकर रावत ने सभी आगंतुकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *