बिहारी महासभा के विश्वकर्मा पूजनोत्सव में उमड़ा जनसैलाब, भक्ति के साथ जीवंत हुई भोजपुरी लोकसंस्कृति

National Uttarakhand

*‘बिहार जन्मभूमि, उत्तराखंड कर्मभूमि’: ललन सिंह अध्यक्ष, बिहारी महासभा
*धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम बने बिहारी महासभा की पहचान ‌: चंदन झा, सचिव
*समाज से प्राप्त सहयोग सामाजिक उत्थान और जनहित के कार्यों में होगा उपयोग : रितेश कुमार, कोषाध्यक्ष
*बिहार से पहुंचे कलाकारों ने बांधा समां, ‘बाबा विश्वकर्मा करिहें बेड़ा पार’ पर देर रात तक गूंजती रही तालियां

देहरादून। भगवान विश्वकर्मा की भक्ति और भोजपुरी संस्कृति के रंगों से हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज का परिसर देर शाम तक सराबोर रहा। बिहारी महासभा उत्तराखंड, देहरादून की ओर से आयोजित विश्वकर्मा पूजनोत्सव में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भव्य पंडाल में भगवान विश्वकर्मा के जयकारों के बीच बिहार से आमंत्रित भोजपुरी कलाकारों ने जागरण की ऐसी प्रस्तुति दी कि श्रद्धालु देर तक भक्ति और लोकसंगीत की धुनों पर झूमते रहे।

पूजनोत्सव के दौरान धार्मिक आस्था के साथ बिहार और पूर्वांचल की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बिहार की प्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायिका प्रियंका मौर्या की प्रस्तुति रही। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को समर्पित भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ‘चलऽ हो विश्वकर्मा बाबा के धाम’ और ‘बाबा विश्वकर्मा करिहें बेड़ा पार’ जैसे भजनों पर मौजूद श्रद्धालुओं ने जमकर तालियां बजाईं और भक्ति में सराबोर होकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।

बिहारी महासभा पिछले दो दशकों से देहरादून में सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से बिहार एवं पूर्वांचल की लोक परंपराओं को जीवंत रखने के प्रयास कर रही है। संगठन की ओर से प्रतिवर्ष छठ पूजा, बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा, विश्वकर्मा दिवस और हरतालिका तीज जैसे प्रमुख पर्वों का आयोजन किया जाता है।

महासभा की गतिविधियां केवल सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं हैं। समय-समय पर रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जांच शिविर, वृक्षारोपण समेत विभिन्न जनहितकारी कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। संगठन का कहना है कि इन आयोजनों के माध्यम से समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने के साथ सामाजिक सरोकारों को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

महासभा के अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि विश्वकर्मा पूजनोत्सव में उमड़ा उत्साह इस बात का प्रमाण है कि देहरादून में रहने के बावजूद लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से महासभा लगातार सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि बिहार हमारी जन्मभूमि है और उत्तराखंड हमारी कर्मभूमि। समाज के सभी वर्गों के सहयोग से संगठन निरंतर आगे बढ़ रहा है और सामाजिक एकता तथा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना महासभा का प्रमुख उद्देश्य है।

महासभा के सचिव चंदन कुमार झा ने कहा कि भोजपुरी जागरण के आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा, लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में नंदिनी शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम महासभा की पहचान बन चुके हैं।

कोषाध्यक्ष रितेश कुमार ने आयोजन की सफलता के लिए सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि समाज से प्राप्त सहयोग का उपयोग सामाजिक उत्थान और जनहित के कार्यों में किया जाता रहेगा।

विश्वकर्मा पूजनोत्सव में महासभा के पूर्व अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, संरक्षक डॉ. रंजन कुमार, कार्यकारिणी सदस्य आलोक सिंह, सुरेंद्र अग्रवाल, प्रभात कुमार सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। गोबिंदगढ़ मंडल से विनय कुमार यादव, गणेश साहनी, विजय पाल, रवि यादव, धर्मेंद्र ठाकुर, गिरधर शर्मा, सुरेश ठाकुर, दिनेश कुमार, बलराम बिट्टू समेत हजारों कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

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