*कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल, सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
(अनुज सेमवाल द्वारा)
देहरादून। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और इससे लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित किए जाने की आशंका पैदा हुई है। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उसे केंद्र की भाजपा सरकार के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस का कहना है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित निर्वाचन आयोग के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों के बीच गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में एसआईआर के माध्यम से मतदाता सूचियों में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है।

इसी मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 25 सितंबर को देशभर में निर्वाचन कार्यालयों के घेराव और विरोध-प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया था। इसी क्रम में उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय तक मार्च निकाला और आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में प्रदर्शन किया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी कड़ी है और इसमें किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटना गंभीर विषय है। पार्टी ने मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा प्रत्येक पात्र मतदाता को अपना नाम सूची में बनाए रखने और आपत्ति दर्ज कराने का पर्याप्त अवसर मिले।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे अथवा उन्हें पद से हटाने की मांग भी उठाई। पार्टी नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक विश्वसनीयता को लेकर पैदा हुए सवालों का समाधान आवश्यक है।
गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक विवाद चल रहा है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि आयोग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और अपात्र या गलत प्रविष्टियों की पहचान करना है। आयोग ने यह भी कहा है कि किसी नोटिस का मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटने का अर्थ नहीं है।

