*झांसी (उप्र) में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व शिक्षा मंत्री रवीन्द्र शुक्ल ने किया सम्मानित
देहरादून /झांसी -हिंदी भाषा, साहित्य और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए देहरादून के प्रख्यात साहित्यकार एवं विद्वान डॉ. जयंती प्रसाद नौटियाल को हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) के प्रतिष्ठित ‘हिंदी साधक सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें 19 जुलाई को झांसी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री रविंद्र शुक्ल ने प्रदान किया।

हिंदी साहित्य और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए सक्रिय हिंदी साहित्य भारती (अंतर्राष्ट्रीय) का संगठनात्मक विस्तार दुनिया के 36 देशों तक बताया जाता है। डॉ. नौटियाल को यह सम्मान हिंदी को वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थान दिलाने से संबंधित उनके शोध कार्यों तथा साहित्य के क्षेत्र में उनके व्यापक और गुणवत्तापूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया है।
डॉ. नौटियाल की साहित्यिक उपलब्धियों का दायरा बेहद व्यापक है। उनकी रचनाएं देश के 70 से अधिक विश्वविद्यालयों में सहायक एवं संदर्भ पुस्तकों के रूप में उपयोग की जा रही हैं। उनके अनुसार, उनके जीवन और कार्यों से संबंधित बायोडाटा 6,170 पृष्ठों में संकलित है, जिसमें 6,107 उपलब्धियों का उल्लेख है। उन्हें हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दो राष्ट्रपतियों द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है तथा अब तक 155 से अधिक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
शैक्षणिक क्षेत्र में भी डॉ. नौटियाल की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। उन्होंने हिंदी में एमए की परीक्षा विश्वविद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण की। इसके अलावा पीएचडी, डी.लिट., एमए अंग्रेजी साहित्य, एमबीए (बैंकिंग एवं वित्त), एलएलबी सहित विभिन्न विषयों में 84 डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण-पत्र प्राप्त किए हैं।
साहित्य सृजन के क्षेत्र में डॉ. नौटियाल ने कविता, कहानी, निबंध, आलोचना सहित साहित्य की लगभग सभी प्रमुख विधाओं में लेखन किया है। विभिन्न विषयों पर उनकी कुल 2,186 रचनाएं सामने आ चुकी हैं, जिन्हें समतुल्यता के आधार पर करीब 270 पुस्तकों के लेखन के बराबर माना गया है।
वे एक सक्रिय वक्ता और शोध मार्गदर्शक के रूप में भी अपनी पहचान रखते हैं। शिक्षा और ज्ञान-विमर्श से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और संगोष्ठियों में वे अब तक 744 व्याख्यान दे चुके हैं। उनकी विशेष पहचान इस बात को लेकर भी है कि उन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के साथ-साथ बैंकिंग, वित्त, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, विपणन और प्रबंधन जैसे विविध विषयों में पीएचडी और एमफिल शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है। विभिन्न विषयों पर उनके 130 शोधपत्र प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश प्रकाशित भी हुए हैं।
साहित्य और शिक्षा के साथ डॉ. नौटियाल ने कृषि क्षेत्र में भी शोध एवं नवाचार का कार्य किया है। सब्जियों और फलों पर किए गए उनके शोध को देश की 12 हजार शोध परियोजनाओं में से चयनित श्रेष्ठ शोध के रूप में Optum–Times of India, Ideas of India राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
कृषि क्षेत्र में उनके शोध का प्रमुख केंद्र ‘ऊंची खेती-ऊंची आय’ की अवधारणा है। इस मॉडल के माध्यम से कम भूमि में अधिक उत्पादन लेकर किसानों की आय में कई गुना वृद्धि की संभावनाओं पर काम किया गया है। उनके अनुसार, सामान्य भिंडी का पौधा जहां करीब चार से पांच फीट तक ऊंचा होता है, वहीं उनके द्वारा विकसित पौधों की ऊंचाई लगभग 15 फीट तक पहुंचती है और पौधे की जड़ से ऊपरी हिस्से तक फलियां लगती हैं। इससे सीमित भूमि में अधिक उत्पादन प्राप्त कर किसानों की आय बढ़ाने की संभावना बनती है।
डॉ. नौटियाल ने इन विकसित प्रजातियों के बीज पंतनगर विश्वविद्यालय को भी उपलब्ध कराए हैं, ताकि विश्वविद्यालय स्तर पर इन पर आगे शोध और विकास किया जा सके तथा उपयोगी प्रजातियों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा सके।

