राजपुर की आदर्श रामलीला में ताड़का वध से गूंजा पंडाल, अहिल्या उद्धार का प्रसंग देख भावविभोर हुए दर्शक

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*जनकपुर प्रस्थान और पुष्प वाटिका प्रसंग ने मोहा मन, राम-लक्ष्मण की मनोहारी छवि ने बटोरी प्रशंसा

राजपुर (देहरादून)- आदर्श रामलीला ट्रस्ट, राजपुर की ओर से आयोजित 77वें रामलीला महोत्सव के दूसरे दिन मंचित धार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धा, भक्ति और रोमांच का अद्भुत समागम प्रस्तुत किया। भगवान श्रीराम के पराक्रम से लेकर अहिल्या उद्धार और जनकपुर की यात्रा तक की घटनाओं का सजीव मंचन देखकर रामभक्त भावविभोर हो उठे। विशेष रूप से ताड़का वध के दृश्य ने दर्शकों में उत्साह भर दिया और पूरा रामलीला परिसर जयकारों तथा तालियों से गूंज उठा।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना के साथ हुआ। इसके बाद मंच पर महर्षि विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के वन गमन का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। ऋषि-मुनियों के यज्ञ एवं तपस्या में विघ्न डालने वाले राक्षसों के आतंक को समाप्त करने के लिए श्रीराम ने ताड़का का वध किया। इसके उपरांत सुबाहु का संहार कर मारीच को रणभूमि से भागने पर विवश कर दिया। इन दृश्यों के प्रभावशाली मंचन ने दर्शकों को रामकथा के घटनाक्रम से बांधे रखा।

राक्षसी ताड़का के वध के पश्चात गुरु विश्वामित्र ने राजकुमार राम और लक्ष्मण को दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा प्रदान की। इसके माध्यम से धर्म की रक्षा और साधु-संतों के यज्ञ, हवन तथा तप-साधना को निर्बाध रूप से संपन्न कराने का संदेश दिया गया।

रामलीला का अगला प्रसंग अहिल्या उद्धार का रहा। गुरु विश्वामित्र के साथ आगे बढ़ते हुए श्रीराम के चरण एक शिला से स्पर्श हुए तो वह शापमुक्त होकर नारी स्वरूप में प्रकट हो गई। महर्षि विश्वामित्र ने बताया कि वह महर्षि गौतम की पत्नी अहिल्या हैं, जिन्हें शाप के कारण शिला बनकर रहना पड़ा था। प्रभु श्रीराम के स्पर्श से उनका उद्धार हुआ। इस प्रसंग ने दर्शकों को भक्ति और करुणा से ओतप्रोत कर दिया। अहिल्या द्वारा श्रीराम के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दृश्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

इसके बाद कथा जनकपुर की ओर बढ़ी, जहां राजा जनक की पुत्री सीता के स्वयंवर का निमंत्रण गुरु विश्वामित्र को प्राप्त हुआ। निमंत्रण स्वीकार कर वे श्रीराम और लक्ष्मण को साथ लेकर जनकपुरी पहुंचे। राजा जनक ने महर्षि विश्वामित्र सहित दोनों राजकुमारों का भव्य स्वागत किया और उनके ठहरने की समुचित व्यवस्था कराई।

प्रातःकाल पूजन के लिए पुष्पों की व्यवस्था करने हेतु गुरु की आज्ञा से श्रीराम और लक्ष्मण पुष्प वाटिका की ओर रवाना हुए। मार्ग में दोनों राजकुमारों के अनुपम सौंदर्य और आकर्षक व्यक्तित्व को देखकर जनकपुरवासी मंत्रमुग्ध रह गए। राम और लक्ष्मण की दिव्य छवि को निहारते हुए लोग अपलक देखते रह गए। पुष्प वाटिका की ओर प्रस्थान का यह प्रसंग दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना। रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने भी राम-लक्ष्मण के सौंदर्य और जनकपुरवासियों के भावों का अत्यंत मनोहारी चित्रण किया है।

महोत्सव के दूसरे दिन श्रीरामलीला कला समिति, देहरादून के वरिष्ठ पदाधिकारी शोभित मांगलिक एवं अन्य पदाधिकारियों का आदर्श रामलीला ट्रस्ट, राजपुर के प्रधान योगेश अग्रवाल एडवोकेट ने स्वागत किया।

इस अवसर पर ट्रस्ट के संरक्षक जयभगवान साहू, प्रधान योगेश अग्रवाल, उपप्रधान संजीव गर्ग, कोषाध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल, मंत्री अजय गोयल, ऑडिटर ब्रह्म प्रकाश वेदवाल, डायरेक्टर चरण सिंह, स्टोर कीपर वेदप्रकाश साहू सहित मोहित अग्रवाल, आदित्य गुप्ता, सुभाष कन्नौजिया, अमन अग्रवाल, करण कन्नौजिया और करण सिंह समेत अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

रामलीला के गीत-संगीत पक्ष में हारमोनियम पर पूर्ण सिंह ने संगत की। आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण, कलाकारों की प्रस्तुतियों और रामकथा के सजीव चित्रण ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।

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