*’एक बुन्देलखण्डी हूं ,सर कटा सकता हूं लेकिन अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता’
*सूचना विभाग जितना आपका उतना ही हम पत्रकारों का : हम और आप से मिलकर बना है “सूचना परिवार”
देहरादून -“सूचना विभाग” क्या अन्य कार्यालयों की भांति यह कार्यालय भी इसके अधिकारियों व कार्मिकों का है,उन्हीं का यहां पर आधिपत्य है।
जी नहीं , बिल्कुल ग़लत। इस कार्यालय पर इसके अधिकारियों व कार्मिकों से अधिक नहीं तो उनके बराबर ही समान अधिकार पत्रकारों का है। हम पत्रकारों व आप कार्मिकों को मिलाकर बना है “सूचना परिवार”
सूचना विभाग के गठन का उद्देश्य ही पत्रकारों व सरकार के मध्य समन्वय स्थापित करना है।सूचना विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले मान्यता कार्डों में भी प्रमुखता से सूचना व लोक सम्पर्क विभाग लिखा रहता है।
A-सूचना के अधिकारियों व कार्मिकों के द्वारा सदैव मिला है अपनेपन व सम्मानपूर्ण व्यवहार :-
इस आलेख के लेखक को उत्तराखंड आए बीस वर्ष हो चुके हैं, इन बीस वर्षों में डा अनिल चंदोला व वर्तमान में आशीष त्रिपाठी के कार्यालयाध्यक्ष के रूप में कार्यालय की कार्यप्रणाली निकट से देखने को मिली।
सूचना विभाग के कार्मिक हों या अधिकारीगण हों, उनसे सदैव इतना अधिक मधुर व सम्मानजनक व्यवहार मिला कि यदि किसी कारणवश तीन चार दिन सूचना निदेशालय नहीं जा पाता हूं तो कुछ अधूरापन सा लगने लगता है। पत्रकारों की ओर से भी अधिकांशतया सम्मानपूर्वक आचरण किया गया है।
अब विचारणीय है कि कार्यालय में जो पहले कभी नहीं हुआ,वह वर्तमान में हो रहा है। अधिकारी हों या कार्मिक कभी भी किसी ने पत्रकारों से बदसलूकी पूर्ण व्यवहार नहीं किया और अधिकांश पत्रकारों ने भी परस्पर सहयोग किया। तो क्या पद के अंहकार में चूर एक राजपत्रित के कृत्य को यूं ही नजरअंदाज कर देना चाहिए,या सूचना विभाग के वातावरण को विषाक्त होने से बचाना चाहिए।
B- बद्रीचन्द्र द्वारा फोन पर दी गई संगीन धमकियों पर क्या कदम उठाया जाए :-उपनिदेशक बद्रीचंद द्वारा पहले तो कार्यालयकक्ष में बदसलूकी की गई और जब सूर्य जागरण ने न्यूज़ प्रकाशित की। तो क्रिमिनल कार्य करते हुए संगीन धमकियां दी और मानहानि परक शब्दों को वाट्सएप पर लिखकर भेजा। अब इस पर क्या कार्रवाई की जाए,यह एक विचारणीय प्रश्न है।
C-बद्रीचंद्र की पुलिस कम्पलेंट व मानहानि का नोटिस भेजना था, एक आसान और कारगर विकल्प :-
बद्रीचन्द्र द्वारा सूर्य जागरण के सम्पादक को दी गई धमकियों पर पुलिस में कम्पलेंट करना एक कारगर कदम है लेकिन सूर्य जागरण में ऐसा नहीं किया।मानहानि परक टिप्पणियों पर डिफेमेशन का नोटिस भेजना भी कारगर कदम था। लेकिन यदि ऐसा नहीं किया गया।
तो इसका केवल एक कारण है कि सूचना के अधिकारियों से लेकर कार्मिकों ने इतना मधुर व सम्मानजनक व अपनेपन का व्यवहार दिया है ,उस कारण ऐसा अभी सोचा तक नहीं है।
D- सूर्य जागरण सूचना विभाग के वातावरण को विषाक्त नहीं होने देगा, उच्चाधिकारियों पर न्याय देने का है भरोसा :-
सूर्यजागरण बद्रीचंद के गलत बर्ताव पर अपने सूचना विभाग के वातावरण को विषाक्त नहीं होने देगा और अपनी ओर से ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिससे सूचना विभाग की गरिमा को ठेस पहुंचे।
उपनिदेशक बद्रीचंद की दो बार लिखित शिकायत विभागाध्यक्ष से की गई है, आशा है कि विभागाध्यक्ष बंशीधर तिवारी व कार्यालयाध्यक्ष आशीष त्रिपाठी द्वारा अपने एक अधीनस्थ अधिकारी द्वारा कार्यालय में बदसलूकी करने व संगीन धमकियां देने के गम्भीर मामले में न्याय प्रदान करेंगे।
E-बुन्देलखंडी हूं,सर कटा सकता हूं,अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता :-
यह लेखक मूल रूप से बुन्देलखण्ड का निवासी है। एक लाइन का सिद्धांत है “न बदसलूकी करो- न बदसलूकी सहो” । “एक बुन्देलखण्डी व्यक्ति अपना सर तो कटा सकता है लेकिन अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकता” है।
पद के अंहकार में एक लोकसेवक ने अपमान तो किया ही है, उच्चाधिकारियों से इंसाफ की आशा भी है। लेकिन यदि इंसाफ नहीं हुआ तो मुझे दोष मत दीजिएगा। क्योंकि जो दोषी होगा वो दंडित तो होगा, परन्तु कब और कैसे,यह एक यक्ष प्रश्न है

