प्रकरण मान्यता नवीनीकरण – डीजी साहब : इन पंक्चर वालों को मान्यता दी किसने है,उसे सस्पेंड करो , पत्रकारों को क्यों अपमानित किया जा रहा है !

National Uttarakhand

उत्तराखंड के बड़े छोटे हर पत्रकार ने साढ़े तीन वर्षों में अपने जिन महानिदेशक बंशीधर तिवारी को देखा है,वह इन दिनों वैसे तो नहीं लग रहे हैं। समारोहों में वह अधिकारियों के बीच में कम पत्रकारों के बीच में अधिक दिखते रहे हैं।
               इस आलेख का लेखक भी डीजी साहब की मिलनसारिता का प्रशंसक रहा है और आज भी यह कलम नहीं चलती यदि  लघु समाचारपत्रों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं हुआ होता। जब राज्यस्तरीय पत्रकारों को एक सप्ताह पहले कार्ड दिए जा चुके हैं तो लघु अखबारों से जुड़े जिला स्तरीय मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ भेदभाव क्यों। ऐसी स्थिति में यह कलम कैसे खामोश रहेगी। यानि बड़ों को पुचकार और छोटों को दुत्कार। यह भेदभाव स्वीकार्य नहीं है।

(आलेख)

(सुरेन्द्र अग्रवाल द्वारा)

देहरादून -जिलास्तरीय मान्यता की मान्य अवधि समाप्त हो जाने पर नए मान्यता कार्ड की मांग करने वाले पत्रकारों को जिले से लेकर निदेशालय तक अपमानित होना पड़ रहा है। कभी जिला सूचना अधिकारी तो कभी अन्य जमकर मखौल उडाकर अपमानित कर रहे हैं। इसमें भी पत्रकारों से दोहरा व्यवहार किया जा रहा है।

जो पत्रकार राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त है, उन्हें तो मान्यता कार्ड कई दिनों पूर्व दिए जा चुके हैं। लेकिन लघु अखबारों से जुड़े जिला स्तरीय मान्यता रखने वालों के लिए कई तरह की ऐसी अपमानजनक बातें की जा रही है जो किसी भी स्वाभिमानी पत्रकार को कष्ट पहुचाएगी

A-डीजी साहब की तल्ख टिप्पणी : पंचर वाले तक है मान्यता प्राप्त :-

लघु समाचारपत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेन्द्र अग्रवाल ने जब महानिदेशक बंशीधर तिवारी को मान्यता कार्ड की मान्य अवधि समाप्त हो जाने से लघु अखबारों को हो रही कठिनाई के बारे में बताया गया। तो बेहद मृदु स्वभाव के तिवारी जी अचानक तल्ख हो उठे। स्वयं उन्हीं के शब्दों में “यहां आकर लोग बता जा रहे हैं कि पंक्चर तक वाले मान्यता प्राप्त है”।

*पहला सवाल- यह कौन लोग हैं विभागीय या गैरविभागीय लोग, जिनकी बातें आप आंख मूंद कर मान रहे हैं।
*दूसरा सवाल – ऐसे पंक्चर वालों को जिस डीआईओ ने मान्यता की संस्तुति की। हमारे पत्रकार समुदाय की गरिमा धूल में मिलाने वाले उन डीआईओ के विरुद्ध अब तक क्या कार्यवाही की गई। उन्हें निलंबित कब करेंगे।

B-मान्यताएं घटेंगी तो हमारा भी बोझ कम होगा –

डीजी साहब की एक और तल्ख टिप्पणी स्वाभिमानी पत्रकारों को कष्ट पहुंचाने वाली रही।उन्होंने कहा कि मान्यताएं घटेंगी तो हमारा बोझ कुछ हल्का होगा। संभवतया उनका आशय था कि कुछ मान्यताएं कम हो जाएंगी तो विभाग पर वित्तीय भार घटेगा।
*पहला सवाल- मान्यता प्राप्त से विभाग पर ऐसा कौन-सा वित्तीय बोझ पड़ता है, जिसके कम हो जाने से सूचना विभाग को राहत मिलेगी।
*मेडिकल बिलों का भुगतान – जिला स्तरीय मान्यता प्राप्त में से कुछ लोग चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल लगाते होंगे। यदि कुछ पत्रकारों के मेडिकल बिलों का बोझ यदि असहनीय होता जा रहा है। तो डीजी साहब नीति बदल दें। उस पत्रकार को यदि जीवित रहना होगा तो चाहे जैसे खरीदे, स्वयं खरीदेगा।
*रोडवेज में निशुल्क यात्रा :- रोडवेज बसों से भी कुछ ही पत्रकार साथी होंगे जो प्रैसकार्य से दिल्ली या अन्यत्र जाते होंगे। तो इसका खर्च भी असहनीय होता जा रहा है तो डीजी साहब को नीति बदल देनी चाहिए।

C-एलआईयू वाले कर रहे हैं जबरदस्त बदसलूकी –

अभी तक नई मान्यता में तो एलआईयू जांच कराई जाती रही है परन्तु नवीनीकरण में नहीं होती थी।परन्तु इस बार सूचना विभाग को पता नहीं क्या सूझ गई तो रिनूवल के लिए भी एलआईयू जांच के लिए भेज दी। एलआईयू वाले पत्रकारों को ऐसे इनट्रोगेट कर रहे हैं। जैसे सीबीआई जांच हो रही हो। एलआईयू वाले संभवतया सूचना विभाग के इशारे पर ही पत्रकारों के साथ जमकर बदसलूकी कर रहे हैं।

D-जिला सूचना अधिकारी भी उड़ा रहे हैं पत्रकारों का जमकर मजाक –

सूचना निदेशालय की मेहरबानी से जिला सूचना अधिकारी बद्री चंद्र नेगी भी पत्रकारों की जमकर इंसल्ट कर रहे हैं। जो डीआईओ अखबारों की कई कई महीनों की फाइलें एक साथ जमाकर रहे हों। जो मंथली फाइल स्वयं भी लाकर जमा कर देते हैं। अब वह भी पत्रकारों की स्थिति का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं।इस लेखक के समक्ष उन्होंने कहा कि कुछ पत्रकारों को मान्यता कार्ड की इसलिए जल्दी है, क्योंकि वह तो सब्जी लेने भी रोडवेज बस से जाते हैं।

E-दोष सिद्धि पर होती है मान्यता समाप्त :-

सूचना विभाग एक शब्द पर बहुत जोर दे रहा है कि मुकदमा है तो मान्यता समाप्त। क्या किसी राज्य कर्मचारी की नौकरी मुकदमा कायम होने पर ही चली जाएगी या दोष सिद्ध होने पर जाएगी

जब किसी कर्मचारी की नौकरी मात्र मुकदमा होने पर नहीं छीनी जा सकती है तो पत्रकार मान्यता क्यों समाप्त हो जाएगी।जो भी जुझारू सोच वाले पत्रकार हैं, उनके दमन हेतु अनेकों बार उत्पीड़न की मंशा से एफआईआर कर दी जाती है, तो क्या वह एफआईआर मात्र दर्ज होने से उसका चरित्र खराब हो गया और वह अपराधी हो गया।

F-31 जनवरी को समाप्त हो चुकी है मान्य अवधि :-

पूरे प्रदेश में एक हजार से अधिक जिलास्तरीय पत्रकार हैं। केवल देहरादून जनपद से पांच सौ से अधिक पत्रकार जिला स्तरीय मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं। इनके मान्यता कार्ड की मान्य अवधि 31 जनवरी तीन सप्ताह पूर्व ही समाप्त हो चुकी है।

G-आशा है कि बडप्पन दिखाएंगे डीजी साहब :-

साढ़े तीन साल के कार्यकाल में महानिदेशक बंशीधर तिवारी जी पत्रकारों के हर वर्ग में अत्यधिक लोकप्रिय रहे हैं। वह कौन है जो उन्हें ऐसे मुद्दे पर उलझाकर अलोकप्रिय बनाने की कोशिश कर रहा है। जो कोई मुद्दा ही नहीं है।‌ वह अपने आदेश के माध्यम से पत्रकार मान्यता के ऐसे नियम निर्धारित कर सकते हैं, जिससे “पंक्चर बनाने जैसे” लोग स्वयं ही मान्यता न ले सकें
🙏सुरेन्द्र अग्रवाल

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