देहरादून – पुरानी कहावत है नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है,यह कहावत सूचना विभाग के उपनिदेशक बद्रीचंद पर पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। अभी हाल में ही उन्हें प्रिंट मीडिया का प्रभारी बनाया गया और वह बनते ही धड़ाधड़ चौके-छक्के मारने में जुट गए हैं। लघु समाचारपत्र एसोसिएशन ने बद्रीचंद के कारनामों की लिखित शिकायत भी भेज गई दी है।
A– 29-30 अगस्त को सूचना में ही लगवा चुके हैं भिंडी बाजार :-
भिंडी बाजार,जी हां बिल्कुल सही लिखा गया है। दरअसल सूचना निदेशालय द्वारा लगभग एक वर्ष से राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर के प्रमुख अखबारों को माह की अंतिम तिथि में एक विज्ञापन निर्गत किया जाता है। जिसका अधिकांश भाग विभाग में सूचीबद्ध विज्ञापन एजेंसियों के माध्यम से जारी होता है।
अभी तक पूर्व प्रभारी रवि बिजानिया के कार्यकाल में यह कार्य शांतिपूर्वक व समन्वय से होता रहा है। लेकिन इस बार पहली मर्तबा अपने बद्री भाई द्वारा एजेंसियों को विज्ञापन कार्य आबंटित किया गया।
चूंकि बद्री भाई टेस्ट मैच नहीं टी-20 मैच के खिलाड़ी बनना चाह रहे थे। तो उन्होंने सूचना विभाग में ही भिंडी बाजार लगवा दिया। गत 29 व 30 अगस्त को विभाग में सूचीबद्ध सभी एजेंसियों की एक के बाद एक परेड कराई गई। एक -एक को बुलाकर मोलभाव किया गया।
जिसने ज्यादा बोली लगाई, उसे ज्यादा काम दे दिया गया। जिन लोगों ने घंटों आंखें फोड़कर सूचना विभाग के लिए डिजाइन तैयार की। उन्हें लालीलाप थमा दिया गया और जिन्होंने डिजाइनिंग का लेशमात्र काम नहीं किया , उनके हिसाब में मलाई दे दी गई।
केवल इसी विज्ञापन में नहीं इसके बाद के विज्ञापनों में भी बद्री भाई द्वारा यही कार्यपद्धति अपनाई गई।
B-एजेसिंयों को विज्ञापन में मनमानी का सवाल पूछे जाने पर पत्रकार से बदसलूकी पर उतरे बद्रीचंद :-
आज दोपहर में सूर्य जागरण के सम्पादक सुरेन्द्र अग्रवाल द्वारा बद्रीचंद से मुलाकात कर एजेंसियों को कार्य आबंटन में मनमानी करने व डिजाइनिंग का कोई कार्य न करने वाली फर्मों को बहुतायत में विज्ञापन देने से सम्बंधित सवाल पूछा गया तो मृदुभाषी दिखने वाले बद्रीचंद के तेवर अचानक तल्ख हो गए।
उपनिदेशक के रूप में काम करने वाले लोकसेवक द्वारा यह कहा गया कि मै डिजाइन बनाने वाले को काम दूं या किसी अन्य को, मेरी मर्जी जिसको होगी,उसे काम दूंगा। तुम कौन होते हो सवाल पूछने वाले।इस पर पत्रकार द्वारा उन्हें याद दिलाया गया कि सरकारी कार्य में मनमर्जी नहीं चलती है, जवाबदेही से काम करना होता है। तब वह बगलें झांकने लगे।
C-बद्रीचंद पर जबरदस्त भ्रष्टाचार के लग रहे हैं आरोप :-
बद्री चंद्र द्वारा विज्ञापन एजेंसियों को कार्य वितरण के मामले में जबरदस्त भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं।केवल एजेंसी के मामले में ही नहीं चाहे व्यवस्था शाखा से सम्बन्धित मामले हों या अखबारों को विशेषांक दिए जाने के मामले हों,जो सूचना विभाग में कभी नहीं हुआ,वह अब देखा जा रहा है।
बद्री भाई अपने इन कारनामों को छुपाते भी नहीं है, यदि कोई बन्धु उनसे सामान्य मुलाकातें भी करते होंगे,तो वह खुलेआम लेन देन की बातें करते दिख जाएंगे।
D-मुख्यमंत्री धामी के भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम को दिखा रहे हैं खुलेआम ठेंगा :-
सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम चलाए हुए हैं। अनेकों कार्यालयों में इस आशय के बोर्ड तक लगवाए गए हैं। टोल फ्री नंबर 1064 का भी उल्लेख किया गया है।
देखना है कि उपनिदेशक बद्रीचंद इस तरह की खुलेआम मनमानी व पत्रकार से बदसलूकी पर महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी जी क्या कदम उठाते हैं।
नोट :- अगली किश्त में पढ़ें, सूचीबद्धता के मामले में भारी बसूली का खाका बना चुके हैं बद्री भाई

